मां ही मेरी जन्नत हैं ।।

बचपन ही सही है
जैसे घर में है मेरी मां ।।

सपने सारे खुशियों से
मेरे पापा ने सजाए ।।

रोना भी तो बहोत था
हमेशा मेरे पास मेरी मां रहे ।।

दिन है यह शरारतो का
मौज मस्ती भरा हुआ था ।।

खाने की थाली लेकर मैंने
बहुत बार मेरे पीछे दौड़ाया भी तो है ।।

मां तो मां ही है जन्नत भी कम है
पिता की मुझमें बसी हुई जान है ।।

नन्नासा तो मेरा जहान है
मेरे मां पापा से हसी भरा मेरा एक जहा हैं ।।

खरचं आज शांत राहवसं वाटतयं…

अाज शांत राहावस वाटतयं
दूर कुठे तरी निघून जावस वाटतयं ,
मनात चालाणाऱ्या संघर्षाला
दूर कुठे तरी लोटाव वाटतयं…

अाज शांत राहावस वाटतयं
नको ती आपुलकीची नाती ,
नकोत त्या विश्वासाच्या गोष्टी
मनाला शांत झोपवस वाटतयं….

अाज शांत राहावस वाटतयं.
नको तो रोज रोज आठवणींचा ओझा ,
नको आपल्यामुळे कोणा दुसऱ्याला सजा
सर्वांपासून दूर राहवस वाटतयं….

खरचं
आज
शांत
राहवसं
वाटतयं….

यादें हमेशा रुलाती हैं।।

आंखों से निकलने वाले आंसू
कभी जूठ नहीं बोलने देती है ।।

कही खामोशियां छुपी हुई हैं
तो कही नाराज़गी दिल में भरी हुई है ।।

पता नहीं आज जिंदगी कोनसा नया मोड़ ले आएगी
कभी आंसुओ ने रुलाया हैं कभी अपनो रुलाया ।।