मां ही मेरी जन्नत हैं ।।

बचपन ही सही है
जैसे घर में है मेरी मां ।।

सपने सारे खुशियों से
मेरे पापा ने सजाए ।।

रोना भी तो बहोत था
हमेशा मेरे पास मेरी मां रहे ।।

दिन है यह शरारतो का
मौज मस्ती भरा हुआ था ।।

खाने की थाली लेकर मैंने
बहुत बार मेरे पीछे दौड़ाया भी तो है ।।

मां तो मां ही है जन्नत भी कम है
पिता की मुझमें बसी हुई जान है ।।

नन्नासा तो मेरा जहान है
मेरे मां पापा से हसी भरा मेरा एक जहा हैं ।।

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बचपन ही सही था ।। 🤗🤗🤗😃😃😊😜😜😍🤪🤪

बचपन ही सही था
शरारतों से भरा हुआ था ।।

मां का प्यार था
छोटिसी थी यह जिंदगी ।।

रोना भी यही था
हसने के भी बहाने थे ।।

छोटे छोटे भाई बहन
मस्ती भरे ओ दिन थे ।।

हसा बसा यह पल
मां बाप का ही साया है ।।

देर से उठाकर भी
हरा भरा दिन था ।।

ना कोई काम था
ना कोई परेशानी थी ।।

छोटासा यह बचपन
नखरे बहुत बड़े थे ।।

मां की कभी डाट थी
तो कही मां की ममता भी थी ।।

गुजर गया छोटासा बचपन
गुजर गया हो अपानसा वक्त ।।

आज हुए बड़े हम
परेशानी से घेहेर हुए ।।

रोना तो आज भी आता है
बीत गया हो कल का पल ।।