बचपन ही सही था ।। 🤗🤗🤗😃😃😊😜😜😍🤪🤪

बचपन ही सही था
शरारतों से भरा हुआ था ।।

मां का प्यार था
छोटिसी थी यह जिंदगी ।।

रोना भी यही था
हसने के भी बहाने थे ।।

छोटे छोटे भाई बहन
मस्ती भरे ओ दिन थे ।।

हसा बसा यह पल
मां बाप का ही साया है ।।

देर से उठाकर भी
हरा भरा दिन था ।।

ना कोई काम था
ना कोई परेशानी थी ।।

छोटासा यह बचपन
नखरे बहुत बड़े थे ।।

मां की कभी डाट थी
तो कही मां की ममता भी थी ।।

गुजर गया छोटासा बचपन
गुजर गया हो अपानसा वक्त ।।

आज हुए बड़े हम
परेशानी से घेहेर हुए ।।

रोना तो आज भी आता है
बीत गया हो कल का पल ।।

9 thoughts on “बचपन ही सही था ।। 🤗🤗🤗😃😃😊😜😜😍🤪🤪

  1. अति सुंदर रचना है आप की | बिल्कुल सही कहा है आपने | बचपन मासूमियत और शरारत से भरपूर जीवन का वह सुनहरा पल है जिसके लिए हम फिर तरसते हैं | Very beautiful poem.

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  2. हा ओ हर पल जिसमें हर खुशियों का कारण बचपन है । यदि हम आज भी सोचते ही की काश हम छोटा होना चाहते हैं तो दिल के भीतर खुशियां ही खुशियां मेहसूस होती, और बीता हुआ समय और बचपन हमे हमेशा आनंद ही प्राप्त करता है ।।

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  3. As a child, we enjoy every sport or childhood memory. But when we were young, we used to play until we found happiness in everything, so sometimes we would play this game after a while.That is why it is so true that even if they remember the days and memories today, they still give joy to the mind. As a child, I used to have a lot of fun and happiness, but life was happy. 🌹🌹😊😊🙄🙄🤪😜🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗

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